जैन कल्याण बोर्ड के गठन को लेकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से मिला आईजा का प्रतिनिधि मण्डल।
पत्रकारो के कवरेज के समय सरकार द्वारा उन्हें पूर्ण सरंक्षण दिया जाएगा.... मुख्यमंत्री मोहन यादव
भोपाल। मध्य प्रदेश शासन के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से आल इण्डिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन आईजा का एक प्रतिनिधि मण्डल मध्य प्रदेश के अध्यक्ष डॉ प्रदीप बाफना के नेतृत्व में मिला। तो वही प्रतिनिधि मण्डल में म.प्र आईजा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव जैन सैनानी,देवास के वरिष्ठ आईजा के कार्यकर्ता शन्नी जैन,युवा समाजसेवी आहान जैन सैनानी उपस्थित थें। इस विशेष मौके पर धरमपुरी के भाजपा विधायक कालूराम ठाकुर विशेष रूप से उपस्थित रहे। प्रतिनिधि मण्डल ने मुख्यमंत्री से विशेष चर्चा में कहा कि जैन समाज के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक दिवस पर प्रदेश में शासकीय अवकाश एंव जैन तीर्थ स्थानो पर पूर्ण रूप से शराब बंदी,जैन समाज के कल्याण बोर्ड के गठन की घोषणा,पत्रकारो पर सरकार द्वारा सुरक्षा के लिए प्रवधान आदि के बारे में जानकारी दी।
मध्यप्रदेश आईजा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ प्रदीप बाफना ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को ज्ञापन सौपते हुए विशेष चर्चा कि जैनों के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक दिवस पर प्रदेश में शासकीय अवकाश घोषित किया जाए। जबकि राजस्थान व अन्य प्रदेशो में भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक पर शासकीय अवकाश के बाद शासकीय व अशासकीय स्कूलो में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश में भी शासकीय अवकाश व समस्त स्कूलो में कार्यक्रमो का आयोजन किया जाए। म.प्र आईजा के उपाध्यक्ष राजीव जैन सैनानी ने कहा कि शराब बंदी के साथ जैन तीर्थो पर भी शराब बंदी पूर्णयता बंद कराई जाए। वही उन्होने कहा कि मध्यप्रदेश में जैन आयोग का गठन सरकार द्वारा किया गया है। लेकिन अभी तक गठन की कोई कार्यवाही नही की गई है। जैन बोर्ड के गठन में मध्यप्रदेश आईजा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ प्रदीप बाफना को मनोनित करने की बात कही। टोंकखुर्द से सन्नी जैन ने मध्यप्रदेश पत्रकारो पर कवरेज के समय उनकी सुरक्षा व्यवस्था के लिए व्यवस्था करने की बात कही।
प्रदेश के मुखिया डॉ मोहन यादव ने प्रतिनिधि मण्डल को आश्वसत किया - मध्य प्रदेश शासन के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आईजा के प्रतिनिधि मण्डल से कहा कि बहुत जल्दी जैन समाज के बडें धार्मिक स्थलों व जैन तीर्थो पर शराब बंदी की जाएगी। साथ ही प्रदेश में भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक दिवस भी धूमधाम से मनाया जाएगा। वही जैन कल्याण बोर्ड की प्रक्रिया भी शीघ्र पूरी की जाएगी। साथ ही पत्रकारो के कवरेज के समय सरकार द्वारा उन्हें पूर्ण सरंक्षण दिया जाएगा।
आईजा ने किया मुख्यमंत्री की घोषणा का स्वागत - पिछले दिनो मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने जैन साधु-साधवियो के प्रवास के दौरान शासकीय स्कूलो व आंगनबाडी केन्द्रो में उनके विश्राम के लिए पूर्ण प्रबंधन किए जाने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद आईजा ने घोषणा का आभार व्यक्त किया।
आईजा ने किया मुख्यमंत्री का सम्मान - भोपाल वल्लभ भवन ने आईजा के प्रतिनिधि मण्डल ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का स्मृति चिन्ह एंव मोहनखेडा गुरूदेव सातम ग्रुप का नववर्ष का कैलेंडर सौंपा। इस अवसर पर आईजा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ प्रदीव बाफना,प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव जैन सैनानी,टोंकखुर्द से सन्नी जैन,आहान जैन सैनानी उपस्थित थें।
भाजपा विधायक कालूराम ठाकुर का किया सम्मान - भोपाल वल्लभ भवन में भाजपा विधायक कालूराम ठाकुर का आईजा ने स्मृति चिन्ह भेंटकर उनका भी सम्मान किया। इस मौके पर आईजा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ प्रदीप बाफना,प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव जैन सैनानी ने कहा कि जैन समाज व आईजा के कार्यक्रमो सदैव भाजपा विधायक कालूराम ठाकुर का विशेष सहयोग व मार्गदर्शन मिलता रहा है। आईजा ने जब जब भी जैन धर्म एंव आईजा द्वारा चलाए गए कार्यक्रम के बारे अहम भूमिका निभाई है। जिससे आईजा को सदैव एक ऊर्जा मिले है। विधायक ने हमेशा देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एंव प्रदेश के मुखिया डॉ मोहन यादव के द्वारा चलाए गए। लोक कल्याण कायक्रमो से आईजा को जोडा।
राष्ट्रीय अध्यक्ष हार्दिक हुंडिया का दिया संदेश - आईजा के प्रतिनिधि मण्डल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को आईजा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हार्दिक हुंडिया के द्वारा चलाए गए कायक्रमो की जानकारी दी एंव डॉ मोहन यादव का आभार व्यक्त किया कि आपके द्वारा मध्यप्रदेश में जैन साधु-संतो को विहार के समय जो विश्राम की सुविधा दी है। उसके लिए धन्यवाद दिया। वही उन्होने अपेक्षा कि अन्य प्रदेशो की भांति मध्य प्रदेश में भी भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव पर शासकीय अवकाश व जैन कल्याण बोर्ड में आईजा के स्थान देने की बात कही।
हिमालय पर्वत के कैलाश शिखर पर समाधिलीन हुए भगवान ऋषभनाथ - आईजा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हार्दिक हुंडिया ने बताया कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म चैत्र कृष्ण नौवीं के दिन सूर्योदय के समय हुआ। उन्हें ऋषभदेव जी, ऋषभनाथ भी कहा जाता है। ऋषभदेव आदिनाथ भगवान का जन्म युग के आदि में राजा नाभिराय जी के यहां पर माता मरूदेवी की कोख में हुआ था। उन्हें जन्म से ही सम्पूर्ण शास्त्रों का ज्ञान था। वे समस्त कलाओं के ज्ञाता और सरस्वती के स्वामी थे। युवा होने पर कच्छ और महाकच्छ की दो बहनों यशस्वती और सुनंदा से ऋषभनाथ का विवाह हुआ। तो वही सुनंदा ने भरत को जन्म दिया, जो आगे चलकर चक्रवर्ती सम्राट बने। उसी के नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा जैन धर्मावलंबियों की ऐसी मान्यता है। आदिनाथ ऋषभनाथ सौ पुत्रों और ब्राह्मी तथा सुंदरी नामक दो पुत्रियों के पिता बने। भगवान ऋषभनाथ ने ही विवाह संस्था की शुरुआत की और प्रजा को पहले-पहले असि सैनिक कार्य, मसि लेखन कार्य, कृषि खेती, विद्या, शिल्प (विविध वस्तुओं का निर्माण) और वाणिज्य-व्यापार के लिए प्रेरित किया। कहा जाता है कि इसके पूर्व तक प्रजा की सभी जरूरतों को क्लपवृक्ष पूरा करते थे। उनका सूत्र वाक्य था- ’कृषि करो या ऋषि बनो। ऋषभनाथ ने हजारों वर्षों तक सुखपूर्वक राज्य किया फिर राज्य को अपने पुत्रों में विभाजित करके दिगम्बर तपस्वी बन गए। उनके साथ सैकड़ों लोगों ने भी उनका अनुसरण किया। जब कभी वे भिक्षा मांगने जाते, लोग उन्हें सोना, चांदी, हीरे, रत्न, आभूषण आदि देते थे, लेकिन भोजन कोई नहीं देता था। इस प्रकार, उनके बहुत से अनुयायी भूख बर्दाश्त न कर सके और उन्होंने अपने अलग समूह बनाने प्रारंभ कर दिए। यह जैन धर्म में अनेक सम्प्रदायों की शुरुआत थी। जैन मान्यता है कि पूर्णता प्राप्त करने से पूर्व तक तीर्थंकर मौन रहते हैं। अतः आदिनाथ को एक वर्ष तक भूखे रहना पड़ा। इसके बाद वे अपने पौत्र श्रेयांश के राज्य हस्तिनापुर पहुंचे। श्रेयांस ने उन्हें गन्ने का रस भेंट किया। जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। वह दिन आज भी ’अक्षय तृतीया’ के नाम से प्रसिद्ध है। हस्तिनापुर में आज भी जैन धर्मावलंबी इस दिन गन्ने का रस पीकर अपना उपवास तोड़ते हैं। इस प्रकार, एक हजार वर्ष तक कठोर तप करके ऋषभनाथ को कैवल्य ज्ञान (भूत, भविष्य और वर्तमान का संपूर्ण ज्ञान) प्राप्त हुआ। वे जिनेन्द्र बन गए। पूर्णता प्राप्त करके उन्होंने अपना मौन व्रत तोड़ा और संपूर्ण आर्यखंड में लगभग 99 हजार वर्ष तक धर्म-विहार किया और लोगों को उनके कर्तव्य और जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति पाने के उपाय बताए। अपनी आयु के 14 दिन शेष रहने पर भगवान ऋषभनाथ हिमालय पर्वत के कैलाश शिखर पर समाधिलीन हो गए। वहीं माघ कृष्ण चतुर्दशी के दिन उन्होंने निर्वाण मोक्ष प्राप्त किया।
*फोटो क्रमांक 01 02*
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