7 फरवरी को णमोकार तीर्थ पर आचार्य देवनंदी महाराज देंगे दीक्षा। दीक्षार्थी बहनों की निकली विनौली यात्रा हुई गोद भराई।
नौकरी छोड़ कर आर्यिका पद पर सुशोभित होगी अदावन परिवार की बाल ब्रह्मचारिणी निधि दीदी।
विश्वास और संतोष रूपी आत्मा को परमात्मा तक ले जाता है... मुनि श्री विमल सागर महाराज
शाहगढ़। नगर गौरव आचार्य देवनंदी महाराज के परम सानिध्य में
णमोकार तीर्थ की पावन धरा पर भव्य जैनेश्वरी दीक्षा का दृश्य बहुत ही दर्शनीय व वंदनीय होगा।6 फरवरी से होने जा रहे 1008श्री पंचकल्याणक महोत्सव में शाहगढ़ के सुरेश श्रीमति पुष्पा सतभैया अदावन परिवार की बेटी निधि आर्यिका दीक्षा लेकर वैराग्य धारण करेगी, शिक्षिका की नौकरी छोड़ कर जिन मार्ग पर कदम रख रही निधि ने बर्ष 1999 में शाहगढ़ अपनी जन्म भूमि पर पहली बार आए नगर गौरव आचार्य देवनंदी महाराज से दीक्षा के भाव किए थे तभी से अनवरत साधना में लीन होकर कई पुस्तकों का लेखन कार्य भी किया।णमोकार तीर्थ की पावन धरा पर 7फरवरी को शाहगढ़ की बेटी निधि और महाराष्ट्र को बेटी मोनिका दोनों की भव्य जैनेश्वरी दीक्षा का दृश्य बहुत ही दर्शनीय व वंदनीय होगा। मंच पर 25 दिगम्बराचार्य 3 सौ मुनि व आर्यिका संघ विराजमान होगे जो दीक्षा के साक्षी होगा।
....दीक्षार्थी निधि मोनिका की गोद भराई ने भावुक कर दिया...
बाल ब्रह्मचारिणी निधि दीदी और मोनिका दीदी दोनों के दीक्षा पूर्व गोद भराई, विनोली यात्रा कार्यक्रम में रथ पर सवार मोक्ष मार्गी दोनों बहनों की एक झलक पाने को बुंदेलखंड के कोने-कोने से दिगम्बर जैन समुदाय के हजारों लोग रविवार को शाहगढ़ पंचायती मंदिर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। यहां तक कि बाल ब्रह्मचारिणी मोनिका दीदी के पैतृक महाराष्ट्र से भी सैकड़ों लोग पधारे थे।आर्यिका दीक्षा से पूर्व दोनों दीदी को श्रावकों ने वस्त्र आभूषण भेंट कर रथ पर विराजमान कर नगर का नगर भ्रमण कराया। इसके बाद ब्रह्मचारिणी दोनों दीदी ने विराजमान युगल मुनि श्री विमल सागर महाराज और मुनि श्री अनंत सागर से आशीर्वाद प्राप्त किया। निधि दीदी द्वारा लिखित जैन आगम का मुख्य शास्त्र जिसे जिनवाणी कहते हैं, युगल मुनि श्री को भेंट किया, जन्म देने वाले माता पिता, परिवार, आदि सबसे क्षमा, सबको क्षमा, निधि दीदी के संस्मरण पल के अंतिम शब्द ने सभी को भावुक कर दिया।
मंच पर विराजमान युगल मुनि श्री विमल सागर मुनि श्री अनंत सागर जी महाराज ने मोक्ष मार्गी दीक्षार्थी बहनों को आशीर्वाद दिया, कार्यक्रम की शोभा बढ़ाते हुए जैन समुदाय को युगल मुनि श्री ने मंगल प्रवचन सुनाया। इसके बाद सभी श्रावकों ने मोक्ष मार्गी दीक्षार्थी बहनों की अनुमोदना करते हुए अरिहंत भगवंत और दीक्षित करने वाले आचार्य देवनंदी महाराज से मोक्ष मार्ग पर चलते हुए सम्पूर्ण जगत में जैन धर्म की प्रभावना के लिए मंगल कामना की।
विश्वास और संतोष रूपी आत्मा को परमात्मा तक ले जाता है... मुनि श्री विमल सागर महाराज
संयम मोक्ष मार्ग पर चलने वाले दीक्षार्थी की अनुमोदना करने हम यहां आए हैं, उनकी मंजिल उन्हें प्राप्त हो, मुनि श्री विमल सागर महाराज ने कहा कि पद, धन, नाम आदि की आकांक्षा लेकर महाराज से अपने लिए मंत्र मांगते हैं, मंत्र पर श्रद्धान और विश्वास रखें वही परम मंत्र है, मंत्र से ही मोक्ष रूपी महल बनता है, विश्वास बनाए रखने वाले दिगंबर संत आज पृथ्वी पर विचरण कर रहे हैं, जन्म से अंत तक णमोकार मंत्र को याद रखें, मुनि श्री विमल सागर ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि दीक्षार्थी ब्राह्मी सुंदरी रूपी दो बहनों की आत्मा से परमात्मा बनने इस मार्ग के प्रति आस्था मजबूत है,णमोकार मंत्र को करते-करते उसी णमोकार मंत्र में शामिल हो जाना ,विश्वास बनाए रखना, संतोष में ही सबसे बड़ा सुख है यहीं मंत्र आत्मा को परमात्मा तक ले जाता है।
मुनि श्री अनंत सागर महराज ने कहा कि हेय और उपादेय का ज्ञान रखने वाला ही बुद्धिमान व्यक्ति है। कषाय संसार में भ्रमण कराता है ,संयम ही मोक्ष मार्ग प्रशस्त करता है। संसार में भ्रमण को समाप्त करने राग ,द्वेष , कषाय, मिथ्यत्व को नष्ट करना होगा । दीक्षा ही सर्वोपरि है मनुष्य पर्याय स्थाई पर्याय नहीं है , पर्याय बदलती रहती हैं। मनुष्य पर्याय में ही संयम धारण करके परिभ्रमण से मुक्त होने का उपाय है।


