शाहगढ़ के आचार्य विद्यासागर भवन में हुई श्रद्धांजलि सभा । णमोकार मंत्र का स्मरण करते हुए दरबारी लाल ने देह त्यागी।

शाहगढ़ के आचार्य विद्यासागर भवन में हुई श्रद्धांजलि सभा ।
णमोकार मंत्र का स्मरण करते हुए दरबारी लाल ने देह त्यागी।
शाहगढ़।जैन सिद्धांत के जानकार परम स्वाध्यायी दानवीर, सरल,दरबारी लाल रामटोरिया अब रहे। उन्होंने 90 बर्ष की उम्र में 26 फरवरी को णमोकार मंत्र का स्मरण करते हुए देह त्यागी। विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने बहुत संयम बनाए रखा आपकी दोनों पुत्र जिनेद्र , सनत सहित नाती देवेंद्र , सीए शुभम ने बहुत सेवा की, जो अनुकरणीय और स्तुत्य है। दरबारी लाल  रामटोरिया समाज अध्यक्ष और शाहगढ़ जैन समाज में विभिन्न पदों पर रहे वें लंबी परंपरा में अंतिम पंक्ति के थे, जिन्होंने मंदिर और धर्म कार्य में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई।
गुरूवार को आचार्य विद्यासागर भवन में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।  सभा में वक्ताओं ने कहा कि आप बहुत ही मधुरभाषी, अत्यंत सहज, शांत, सरल स्वभाव वाले एक बहुत ही बहुमुखी विशिष्ठ व्यक्तित्व के धनी थे। इस दौरान द्रोणागिर उदासीन आश्रम ट्रस्ट एवं प्रबंध कमेटी, गौ शाला समिति, गोलापूर्व महासभा, पंचायती त्रिमूर्ति जिनालय,शांति बिहार जिनालय, सहित वैश्य समाज, असाटी समाज, गहोई समाज, जैन मिलन, प्रेस क्लब समेत बुंदेलखंड की सकल जैन समाज समिति से शामिल प्रतिनिधियों ने शोक व्यक्त करते हुए उनके आचरण और उनके सर्वसमाज हित के  कार्यों पर प्रकाश डालते हुए उनके सिद्धांतों को अमल में लेने की बात कही और श्रद्धांजलि दी। गौरतलब है कि दिवंगत दरबारी लाल जी की दान करने की भावना को मूर्त रूप देने में द्रोणागिर उदासीन आश्रम ट्रस्टी जिनेद्र, सनत रामटोरिया और स्व रविंद्र तीनों पुत्रों का निर्माणधीन सहस्त्र कूट जिनालय समेत  त्रिमूर्ति जिनालय,शांतिबिहार जिनालय में निरंतर योगदान रहा है।

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