इंदौर निवासी 76 साल के लक्ष्मण नामदेव 8 महीने से 40 किलो वजन लेकर नगाड़ा बजाते हुए नंगे पांव चल रहे हैं,  इंदौर से अयोध्या ,बोधगया तक 4 हजार किलों मीटर लंबा सफर नंगे पांव जाएंगे।

इंदौर निवासी 76 साल के लक्ष्मण नामदेव 8 महीने से 40 किलो वजन लेकर नगाड़ा बजाते हुए नंगे पांव चल रहे हैं,

 

 इंदौर से अयोध्या ,बोधगया तक 4 हजार किलों मीटर लंबा सफर नंगे पांव जाएंगे।

 

 

शाहगढ़।इंदौर के रहने वाले लक्ष्मण नामदेव ने एक अनोखी पहल शुरू की है, वो इस समय तिरंगा लेकर 4 हजार किलोमीटर लंबी पदयात्रा पर निकले हैं, इस यात्रा का उद्देश्य देश-दुनिया में अमन-चैन और शांति का संदेश देना है, लक्ष्मण को अभी भी पुलवामा में शहीद हुए जवानों की शहादत का दर्द सता रहा है, वह सीमा पर तैनात सैनिकों की शहादत और कोरोना महामारी में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए यह यात्रा कर रहे हैं,

 

.....इंदौर से शुरू की है नंगे पांव पदयात्रा

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लक्ष्मण नामदेव (76) ने अपनी यह पदयात्रा 7 जुलाई 24 को इंदौर से शुरू की थी, गुरूवार को वह शाहगढ़ पहुंचे, यहां से वे अयोध्या के लिए रवाना होंगे, प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में उनके दर्शन के बाद वे भगवान बुद्ध की धरती बोधगया भी जाएंगे, जो बिहार के गया जिले में है, 8 महीने से 40 किलो वज़न लेकर नंगे पांव चल रहे लक्ष्मण की यह पदयात्रा 4 हजार किलोमीटर की होगी,उन्होंने इस यात्रा को 'विश्व शांति कावड़ यात्रा' का नाम दिया है,

 

 ....4 मार्च को 76 वे साल में प्रवेश करेंगे लक्ष्मण नामदेव ...

 

4 मार्च 1949 को इंदौर जिले के राजवाड़ा गांव में जन्में लक्ष्मण नामदेव गणवीर 76 बर्ष के हों रहे हैं, आगामी 4 मार्च मंगलवार को उनका जन्मदिन है, मीडिया से रूबरू हुए लक्ष्मण नामदेव ने अपनी मंगलमय यात्रा के संस्मरणों को सुनाया उन्होनें बताया कि "देश दुनिया में अमन-चैन और शांति की प्रार्थना के लिए अयोध्या और बोधगया जा रहे हैं, कारगिल युद्ध और पुलवामा जैसे हमलों में शहीद होने वाले सैनिकों और कोरोना काल में मृत हुए लोगों को श्रद्धा सुमन अर्पित करना उद्देश्य है, वह अयोध्या से बोधगया जाएंगे,

उनका पूरा परिवार शिक्षित है, उन्होंने बताया कि वे पिछले लंबे समय से यह शादी विवाह में ढोल बजाने का काम करते आ रहे हैं, इनके दो बेटे और दो बेटियां हैं, दोनों बेटियों की शादी हो गई, एक बेटा होटल मैनेजमेंट का काम करता है तो दूसरा LIC में है,घर में नाती पोता भी हैं, करीब 5 फीट कद काठी के लक्ष्मण नामदेव ने 8 महीने पहले 7 जुलाई 2024 को अपनी यह यात्रा शुरू की थी, जिसमें वे रोजना 10 से लेकर 20 किलोमीटर तक की यात्रा करते हैं, इसमें वह अपने हाथों में घुंघरू और सीने पर लटकाए ढोल को बजाते ही चलते हैं,प्रयागराज में पिंडदान करेंगे ,76 वर्षीय इन बुजुर्ग की यात्रा का उद्देश्य क्या है इसके लिए वह एक फ्लेक्स भी बनवाए हुए हैं जो ढोल के आगे बांध रखा है, जिसे पढ़ कर लोग समझ जाते हैं, लक्ष्मण बताते हैं कि अपनों के लिए जिया तो क्या जिया दूसरों के लिए जी कर देखो अलग ही खुशबू आती है, बीते साल में चाहे पुलवामा में शहीद हुए सैनिक हो, बोर्डर पर शहीद हो, कोरोना काल में मृत हुए लाखों लोग हो, या नेता अभिनेता महापुरुष गायक उन सभी को श्रद्धांजलि अर्पित करने और माता पिता का पिंडदान गया जी में करेंगे, उन्होंने अपनी यात्रा को विश्व एकता कावड़ यात्रा का नाम दिया है।

 

 

......लक्ष्मण का संदेश...हम जागेंगे तो दुनिया जागेगी....

 

 

बचपन से संगीत प्रेमी रहे लक्ष्मण नामदेव गणवीर का नगाड़ा बजाते हुए यात्रा करने को लेकर कहना है कि हम जागेंगे तो दुनिया जागेगी, हम सोएंगे तो दुनिया सो जाएगी, इसलिए लोगों को जगाने के लिए यह ढोल बाजार रहा हूं, उनकी यह तिरंगा को साथ लेकर नंगे पांव सुबह 5 बजे से शाम पांच तक पद यात्रा हाेती है, सूर्य अस्त होने के पहले ही अपने तिरंगे को लपेट कर जहां जगह मिली वहीं अपना डेरा डाल दिया। उनकी संगीत से जुड़ी कलाओं का दीदार करने लोग उनके पीछे पीछे लंबी दूर तक चलते हुए उनकी संगीत का आंनद लेते हैं।नगर सहित क्षेत्र के सनातन प्रेमी लोगों द्वारा 76 वर्षीय लक्ष्मण जी के इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि यह पदयात्रा विश्व शांति और मानवता को संदेश और सनातन धर्म से जोड़ने की भावना पैदा करता है।

 

फोटो सहित